धनबाद जिले में ग्रामीण महिलाओं को हुनरमंद बनाकर स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से कौशल प्रशिक्षण शुरू किया गया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट), दिल्ली के 40 छात्रों की टीम बलियापुर के घोंघाबाद और लालाडीह में महिलाओं को एक सप्ताह तक निःशुल्क प्रशिक्षण दे रही है। टीम धनबाद के साथ जमशेदपुर में भी महिलाओं के लिए प्रशिक्षण गतिविधियां चला रही है।
कार्यक्रम में अलग-अलग स्थानों पर उपयोगी शिल्प तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। सिंदरी में महिलाओं को एप्लिक कार्य और सॉफ्ट टॉयज बनाना सिखाया जा रहा है, जबकि बलियापुर में बांस शिल्प का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को ऐसे व्यावहारिक कौशल से परिचित कराना है, जिनका उपयोग वे स्वरोजगार के लिए कर सकें।
निफ्ट के लेदर डिजाइन विभाग के छात्र पार्थ राजन और वेदिका कक्कड़ के अनुसार, प्रशिक्षण के दौरान कपड़ों पर एप्लिक कार्य, चार्म्स की चेन तैयार करना और रंगों को उकेरने की तकनीक भी सिखाई जा रही है। इस अभ्यास में महिलाओं को निर्माण प्रक्रिया की बारीकियां समझाने पर ध्यान दिया गया है।
यह प्रशिक्षण देवघर की संस्था दिनकर हार्ट इनोवेशन फाउंडेशन के आमंत्रण पर आयोजित किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से यह अभियान वर्ष 2016 से चल रहा है। निफ्ट के छात्र अपनी चार वर्षीय पढ़ाई के दौरान दो बार ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए आते हैं।
झारखंड में चल रहे प्रशिक्षण का निर्देशन निफ्ट की शिक्षिका डॉ. तुलीका महंती और डॉ. डोली कुमार कर रही हैं। छात्र दल में तेहजीब इकबाल, वेदिका कक्कड़, अमृता खरे, तेरेसा लाइकोन्जिम, वारोहल और पार्थ राजन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
एक सप्ताह की इस पहल में महिलाओं को केवल तैयार वस्तुएं दिखाने के बजाय उन्हें बनाने की तकनीक से परिचित कराया जा रहा है। घोंघाबाद और लालाडीह में आयोजित प्रशिक्षण से प्रतिभागियों को एप्लिक, सजावटी चेन और बांस आधारित शिल्प जैसे काम सीखने का अवसर मिला है।