धनबाद जिले में पानी की गुणवत्ता को लेकर आईआईटी-आईएसएम के एक अध्ययन में चिंताजनक स्थिति सामने आई है। संस्थान के पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आलोक कुमार सिन्हा के नेतृत्व में हुए शोध में 262 जल नमूनों की जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार इनमें 54.96 प्रतिशत नमूने पीने के लिए अनुपयुक्त पाए गए।
अध्ययन के लिए जनवरी 2025 में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से नमूने एकत्र किए गए थे। इनमें कुओं, हैंडपंपों, ट्यूबवेल, तालाबों और अन्य जलस्रोतों का पानी शामिल था। जांच में पानी की अम्लीयता, घुले पदार्थ, लवण, कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, क्लोराइड, सल्फेट, नाइट्रेट, फ्लोराइड, फिनोल और कई भारी धातुओं जैसे मानकों को परखा गया।
शोधकर्ताओं ने जल गुणवत्ता का आकलन समग्र सूचकांक के आधार पर किया। इसके तहत नमूनों को बहुत अच्छी, अच्छी, खराब, बेहद खराब और पीने के लिए अनुपयुक्त श्रेणियों में बांटा गया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक आधे से अधिक नमूनों का अंतिम श्रेणी में आना जिले के विभिन्न जलस्रोतों पर निर्भर आबादी के लिए चिंता का विषय है।
बलियापुर के घड़बड़ गांव के ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति महीनों से बंद है। उनका कहना है कि नियमित रूप से फिल्टर किया हुआ पानी नहीं मिलने के कारण लोगों को उपलब्ध स्रोतों और कभी-कभी नदी के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। गांव में बनी पानी की टंकी से भी नियमित आपूर्ति नहीं होने की शिकायत की गई है।
स्थानीय निवासी पवन सरकार के अनुसार, पानी को बाल्टी में रखने पर लाल रंग की परत जम जाती है। ग्रामीणों ने हड्डी और कमर दर्द, दांतों की परेशानी, सिरदर्द तथा कमजोरी जैसी समस्याओं की भी शिकायत की है। हालांकि उपलब्ध अध्ययन विवरण में इन स्वास्थ्य समस्याओं का किसी विशेष प्रदूषक से प्रत्यक्ष संबंध स्थापित किए जाने की जानकारी नहीं दी गई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और राज्य सरकार से स्वच्छ पेयजल की नियमित व्यवस्था करने तथा स्थानीय जलस्रोतों की गुणवत्ता जांच कराने की मांग की है। अध्ययन के निष्कर्ष धनबाद में स्रोतवार जांच, प्रभावित इलाकों की पहचान और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।