रांची में वार्ता के बाद भी नहीं बनी सहमति, 108 एम्बुलेंस कर्मियों ने 21 अक्टूबर से हड़ताल का एलान दोहराया

स्वास्थ्य मंत्री के साथ बैठक में सभी मांगों पर सहमति नहीं बनने के बाद कर्मचारी संघ ने चरणबद्ध आंदोलन जारी रखने और 21 अक्टूबर से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की बात कही है।

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रांची में 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों की मांगों पर हुई वार्ता से संबंधित दृश्य

रांची के नामकुम स्थित स्वास्थ्य मुख्यालय में शुक्रवार को हुई वार्ता के बाद भी 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों और सरकार के बीच सभी मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। झारखंड प्रदेश एम्बुलेंस कर्मचारी संघ ने अपना चरणबद्ध आंदोलन जारी रखने तथा 21 अक्टूबर से प्रस्तावित राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का एलान दोहराया है।

आईपीएच सभागार में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में संघ के प्रतिनिधियों के साथ करीब दो घंटे बैठक चली। इससे पहले कर्मचारी 40 घंटे की हड़ताल और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर चुके थे। बैठक का उद्देश्य कर्मचारियों की लंबित मांगों पर बने गतिरोध को समाप्त करना था।

वार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने दुर्गा पूजा के समय एम्बुलेंस जैसी आवश्यक सेवा ठप किए जाने पर नाराजगी जताई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंत्री कुछ मांगों पर सहमत दिखे, लेकिन सेवा का संचालन निजी एजेंसी के बजाय जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से कराने की मांग स्वीकार नहीं की गई।

बैठक के बाद संघ ने कहा कि सरकार ने उसकी एक मांग स्वीकार की, जबकि दो अन्य मांगों पर सहमति नहीं बनी। संघ की मांगों में बर्खास्त कर्मचारियों की पुनर्बहाली, लंबित वेतन का भुगतान और श्रमिक तथा वैधानिक अधिकार सुनिश्चित करना भी शामिल है। सभी मांगों का समाधान नहीं होने का हवाला देते हुए संगठन ने आंदोलन जारी रखने का निर्णय बताया।

वेतन भुगतान को लेकर भी बैठक में विवाद बना रहा। संघ के अनुसार, संचालन से जुड़ी कंपनी ने जुलाई और अगस्त के भुगतान संबंधी प्रमाण पेश किए, लेकिन कर्मचारी प्रतिनिधियों ने इन दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल उठाया और जांच की मांग की। यह संघ का दावा है; उपलब्ध विवरण में इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी ने कहा कि बैठक के बावजूद सभी मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। संगठन ने स्पष्ट किया है कि उचित समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रस्तावित हड़ताल लागू होने की स्थिति में इसका दायरा पूरे झारखंड में होगा, क्योंकि संघ ने इसे राज्यव्यापी कार्यक्रम के रूप में घोषित किया है।