रांची में खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए धान अधिप्राप्ति व्यवस्था में कई बदलावों का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव के अनुसार धान बेचने के लिए पंजीकृत प्रत्येक किसान की जमीन का सत्यापन संबंधित अंचल कार्यालय से कराया जाएगा। किसानों के लिए ई-केवाईसी भी अनिवार्य करने की तैयारी है।
विभाग का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य धान खरीद में बिचौलियों और दूसरे राज्यों के लोगों की अवैध दखल रोकना है। विभागीय मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा है कि खरीद प्रक्रिया में बिचौलियागिरी या किसी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार ने किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने को प्राथमिकता बताया है।
प्रस्ताव में खरीद केंद्रों की निगरानी के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। प्रत्येक केंद्र के वजन, धान जमा करने और लोडिंग वाले हिस्सों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों को निगम के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ने और रिकॉर्डिंग को 30 दिनों तक सुरक्षित रखने की योजना है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर प्रक्रिया की जांच की जा सके।
धान और चावल की ढुलाई करने वाले वाहनों में जीपीएस लगाना भी अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इसके माध्यम से वाहनों की आवाजाही और माल के परिवहन पर वास्तविक समय में नजर रखी जाएगी। विभाग के अनुसार इससे ढुलाई के दौरान संभावित गड़बड़ियों की पहचान करने और उन पर रोक लगाने में सहायता मिलेगी।
नई व्यवस्था में झारखंड के बाहर स्थित राइस मिलों को धान की मिलिंग के लिए संबद्धता नहीं देने की बात भी कही गई है। पिछले वर्षों के बकायेदार अधिप्राप्ति केंद्रों और विवादित राइस मिलों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। इससे खरीद से लेकर मिलिंग तक की प्रक्रिया को राज्य के भीतर अधिक जवाबदेह बनाने की तैयारी है।
सत्र 2026-27 के कुल लक्ष्य में 25 प्रतिशत इम्प्रूव्ड राइस प्राप्त करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा क्यूआर टैग लगी बोरियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रस्ताव लागू होने पर किसान पंजीकरण से लेकर खरीद, परिवहन और मिलिंग तक अलग-अलग चरणों की निगरानी तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर की जाएगी।