रांची के बीआईटी मेसरा में आयोजित 36वें दीक्षांत समारोह के दौरान परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने देश की परमाणु ऊर्जा योजनाओं में झारखंड की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, भारत के कुल यूरेनियम उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत है। परमाणु बिजली उत्पादन के लिए यूरेनियम प्रमुख कच्चा माल है।
डॉ. मोहंती ने बताया कि विकसित भारत 2047 के तहत देश की परमाणु बिजली उत्पादन क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2031 तक 21 नए रिएक्टर तैयार करने की योजना है। इनके जुड़ने के बाद देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़कर 22.36 गीगावाट होने का अनुमान है।
झारखंड में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की संभावना पर उन्होंने कहा कि किसी भी स्थान का चयन कई तकनीकी मानकों के आधार पर होता है। इसके लिए उपयुक्त भूमि, भूकंपीय दृष्टि से सुरक्षित क्षेत्र और पर्याप्त जल उपलब्धता आवश्यक है। राज्य में संयंत्र को लेकर चर्चा और रुचि जरूर है, लेकिन अभी यहां कोई परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित नहीं हुआ है।
जादूगोड़ा में उठती स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर आयोग अध्यक्ष ने कहा कि इस विषय पर कई अध्ययन किए जा चुके हैं। उनका कहना था कि स्वास्थ्य समस्याओं को केवल खनन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सामान्य और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं को अलग-अलग समझते हुए उनके समाधान पर काम करने की जरूरत है।
उन्होंने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में स्टार्टअप की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक डीप-टेक नवाचार, नेट-जीरो लक्ष्य और नीतिगत बदलावों से निजी उद्यमियों के लिए अवसर उभर रहे हैं। स्टार्टअप छोटे और सुरक्षित मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित करने की दिशा में काम कर सकते हैं, जिनका उपयोग डेटा सेंटरों और औद्योगिक संयंत्रों को लगातार स्वच्छ बिजली देने में हो सकता है।
बीआईटी मेसरा के साथ प्रत्यक्ष सहयोग के सवाल पर डॉ. मोहंती ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई सीधा सहयोग नहीं है। हालांकि, परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत बोर्ड ऑफ रिसर्च इन न्यूक्लियर साइंसेज विभिन्न क्षेत्रों की अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देता है। इसके लिए शोधकर्ता और संस्थान अपने प्रस्ताव जमा कर सकते हैं।