धनबाद में झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार और बीसीसीएल के बीच बाजार फीस को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया है। बीसीसीएल ने बकाया मद में झमाडा को 26 करोड़ रुपये का एकमुश्त भुगतान जारी किया है। बाजार फीस प्राधिकार की आय का प्रमुख स्रोत होने के कारण यह राशि उसके लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बीसीसीएल सालाना डिस्पैच पर एक प्रतिशत शुल्क देता है। एमएमडीआर संशोधन विधेयक 2026 का हवाला देते हुए कंपनी ने इस शुल्क का भुगतान रोक दिया था। उसका तर्क था कि संशोधन के बाद केंद्र सरकार के अतिरिक्त कोई दूसरी एजेंसी खनन क्षेत्र में टैक्स या फीस की वसूली नहीं कर सकती।
भुगतान रुकने के बाद झमाडा ने इस विषय पर कानूनी सलाह ली। प्राधिकार की ओर से बीसीसीएल को बताया गया कि संबंधित राशि कोई टैक्स नहीं, बल्कि बाजार फीस है। यह शुल्क बाजारों के रख-रखाव और वहां उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं के एवज में लिया जाता है।
झमाडा ने अपने पक्ष के समर्थन में विस्तृत दस्तावेज भी बीसीसीएल को उपलब्ध कराए। प्राधिकार ने स्पष्ट किया कि बाजार फीस एमएमडीआर अधिनियम के दायरे में नहीं आती। उपलब्ध विवरण के अनुसार, दस्तावेजों और स्पष्टीकरण पर संतुष्ट होने के बाद बीसीसीएल ने रोकी गई राशि जारी कर दी।
बाजार फीस का भुगतान नहीं होने से झमाडा के सामने वित्तीय दबाव बढ़ गया था और कर्मचारियों के वेतन को लेकर संकट की स्थिति बन गई थी। अब 26 करोड़ रुपये मिलने से प्राधिकार को आर्थिक राहत मिली है। इसके साथ ही कर्मचारियों के वेतन से जुड़ी चिंता भी कम होने की संभावना है।
इस भुगतान के बाद दोनों संस्थाओं के बीच बाजार फीस की प्रकृति को लेकर बनी असहमति फिलहाल दूर हो गई है। मामले में झमाडा का पक्ष यह रहा कि वसूली बाजारों के रख-रखाव और सुविधाओं से जुड़ी है, जबकि बीसीसीएल ने संशोधित खनन प्रावधानों के आधार पर पहले भुगतान रोक रखा था।