गिरिडीह जिले के पीरटांड़ स्थित मधुबन थाना मैदान में गुरुवार को आयोजित मरांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए। उन्होंने संताली भाषा में उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए आदिवासी समाज को संगठित, सशक्त और प्रगतिशील बनाने के लिए सामूहिक भागीदारी और आपसी सहयोग पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज को प्राप्त विशिष्ट सामाजिक अधिकारों को भारतीय संविधान में भी मान्यता दी गई है। उन्होंने मरांग बुरू धोरोमगाड़ के संरक्षण को जरूरी बताते हुए इसकी देखभाल के लिए समाज के लोगों से मिलकर प्रयास करने की अपील की। महासम्मेलन के आयोजकों की ओर से किए जा रहे सामाजिक प्रयासों की भी उन्होंने सराहना की।
अपने संबोधन में सोरेन ने जंगल, पारंपरिक आजीविका और आदिवासी जीवन के संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जंगल से रोजगार मिलता है और आदिवासी समाज के लिए उसका विशेष महत्व है। कृषि और पशुपालन को पारंपरिक जीविकोपार्जन का प्रमुख आधार बताते हुए उन्होंने नई पीढ़ी के इन गतिविधियों से दूर होने पर चिंता जताई।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपने समाज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, रीति-रिवाज और परंपराओं को समझने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति के इस दौर में समाज को शैक्षणिक, बौद्धिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए एकजुट प्रयास आवश्यक हैं। उनके मुताबिक, पूर्वजों से मिली विरासत को सुरक्षित रखते हुए विकास के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा।
नशाखोरी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इससे आदिवासी समाज कमजोर हो रहा है। उन्होंने लोगों से नशामुक्त समाज के निर्माण में सहयोग करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने सामूहिक जागरूकता अभियान और फूलो-झानो आशीर्वाद योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि योजना का उद्देश्य हड़िया और अवैध शराब बेचने वाली महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका तथा स्वरोजगार से जोड़ना है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने महासम्मेलन के मंच से सौंपे गए ज्ञापन पर न्यायसंगत विचार करने की बात कही और समाज को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। उनका संबोधन मुख्य रूप से सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण, सामाजिक एकता, शिक्षा, आर्थिक प्रगति और नशे से मुक्ति जैसे विषयों पर केंद्रित रहा।