हजारीबाग में दो दिवसीय सोहराय महोत्सव शुरू, कला और पारंपरिक संस्कृति पर केंद्रित आयोजन

संत कोलंबा कॉलेज मैदान में शुरू हुए सोहराय महोत्सव में लोककला, हस्तशिल्प और झारखंडी खानपान को प्रदर्शित किया गया है। पद्मश्री बुलू इमाम ने आयोजन का उद्घाटन किया।

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हजारीबाग के संत कोलंबा कॉलेज मैदान में आयोजित सोहराय महोत्सव का दृश्य

हजारीबाग के संत कोलंबा कॉलेज मैदान में गुरुवार को दो दिवसीय सोहराय महोत्सव 2026 का शुभारंभ हुआ। झारखंड की लोककला, संस्कृति और परंपरा के संरक्षण तथा प्रोत्साहन पर केंद्रित इस आयोजन का उद्घाटन पद्मश्री बुलू इमाम ने किया। स्थानीय लोग महोत्सव में सोहराय कला और उससे जुड़ी परंपराओं की जानकारी ले रहे हैं।

महोत्सव का आयोजन युवा हो इंटरटेनमेंट कल्चरल टीम और सोहराय महोत्सव आयोजन समिति ने संयुक्त रूप से किया है। आयोजकों के अनुसार, इसका प्रमुख उद्देश्य युवाओं को झारखंड की कला-संस्कृति से परिचित कराना और सोहराय कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायता करना है। इसके लिए परिसर में अलग-अलग गतिविधियां रखी गई हैं।

आयोजन के दौरान कलाकार आगंतुकों को सोहराय कला की विशेषताओं के बारे में बता रहे हैं। महोत्सव स्थल पर लगी हस्तशिल्प प्रदर्शनी और झारखंडी खानपान के स्टॉल भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। पूरे परिसर में राज्य की कला, सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक जीवनशैली की झलक प्रस्तुत की गई है।

उद्घाटन के अवसर पर बुलू इमाम ने हजारीबाग में सोहराय कला के नाम पर महोत्सव आयोजित होने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि यह कला गरीब महिलाओं और कलाकारों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। हजारीबाग की सोहराय कला ने अपनी विशिष्ट शैली के कारण अलग पहचान बनाई है।

बुलू इमाम के मुताबिक, सोहराय और कोहबर कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है और विदेशों में सोहराय कला की 70 प्रदर्शनियां लगाई जा चुकी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में आयोजित होने वाले बिनाले में सोहराय कला की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

दो दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव कला के प्रदर्शन के साथ उसके सामाजिक और आर्थिक महत्व को सामने लाने का मंच भी बना है। आयोजन के माध्यम से स्थानीय कलाकारों, हस्तशिल्प और पारंपरिक खानपान को एक ही परिसर में दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है।