लोहरदगा सदर प्रखंड के मन्हो गांव में विजयादशमी के अवसर पर पारंपरिक जतरा आयोजित किया गया। आयोजन में ग्रामीणों के साथ विभिन्न खोड़हा दलों और आसपास के गांवों से आए पाहन-पुजारों ने भाग लिया। लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
आयोजन समिति ने ढोल-नगाड़ों और मांदर की थाप के बीच अतिथियों का स्वागत किया। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और सामूहिक भागीदारी ने जतरा को स्थानीय संस्कृति से जोड़े रखा। कार्यक्रम में ग्रामीणों का उत्साह दिखा और आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में लोग जुटे।
सभा को संबोधित करते हुए सांसद सुखदेव भगत ने जतरा को आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा पूर्वजों से मिली है और इसे सुरक्षित रखना नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने की अपील की।
सांसद ने अपने संबोधन में पुराने समय के जतरा की सामाजिक भूमिका का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, ऐसे आयोजन समाज से जुड़ी समस्याओं और विकास के विषयों पर चर्चा, आपसी संबंध मजबूत करने तथा विवाह संबंध तय करने के माध्यम भी रहे हैं। उन्होंने अखड़ा, नगाड़ा, मांदर और जतरा को आदिवासी समाज की पहचान से जोड़ा।
सभा के बाद सांसद विभिन्न खोड़हा दलों के बीच पहुंचे और उनके साथ सामूहिक नृत्य में भाग लिया। पारंपरिक संगीत और नृत्य के बीच कार्यक्रम आगे बढ़ा। आयोजन में सभी वर्गों की भागीदारी तथा आपसी भाईचारे के महत्व पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम में आलोक कुमार साहू, अविनाश उरांव, वीरेंद्र यादव, जीवन राम और नवीन शाहदेव सहित आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित थे। गांव तथा आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे पाहन-पुजारों ने भी आयोजन में हिस्सा लिया। जतरा का मुख्य संदेश स्थानीय परंपराओं को जीवित रखने और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने पर केंद्रित रहा।