माध्यमिक आचार्य भर्ती में 200 से अधिक अभ्यर्थियों की डिग्रियों की होगी जांच

जेएसएससी से अनुशंसित 877 अभ्यर्थियों में 200 से अधिक के प्रमाणपत्रों पर स्क्रीनिंग कमेटी ने संदेह जताया है। विभागीय जांच के बाद ही नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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रांची में माध्यमिक आचार्य भर्ती के प्रमाणपत्रों की जांच से जुड़ी प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया के तहत 200 से अधिक अभ्यर्थियों की शैक्षणिक डिग्रियां जांच के दायरे में आ गई हैं। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने कुल 877 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा की थी। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की स्क्रीनिंग कमेटी ने इनमें से कुछ प्रमाणपत्रों पर संदेह जताते हुए सत्यापन के बाद ही नियुक्ति करने की अनुशंसा की है।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग अब संबंधित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से अनुरोध करेगा। इसके लिए विभागीय पत्राचार की तैयारी की जा रही है। जांच से अनुशंसा मिलने के बाद ही प्रभावित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए जाने की बात सामने आई है।

स्क्रीनिंग कमेटी के अनुसार, जांच के दायरे में आए 200 से अधिक अभ्यर्थियों की एमए अथवा बीएड की डिग्रियां निजी विश्वविद्यालयों से प्राप्त हैं। कमेटी ने स्नातक के चार से छह वर्ष बाद एमए या बीएड करने तथा कुछ अभ्यर्थियों द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले डिग्री हासिल करने जैसे बिंदुओं को सत्यापन योग्य माना है।

इन अभ्यर्थियों में लगभग 100 ने दो निजी विश्वविद्यालयों से डिग्री प्राप्त की है। हालांकि, किसी प्रमाणपत्र को अभी अंतिम रूप से अमान्य घोषित किए जाने की जानकारी नहीं है। प्रस्तावित जांच का उद्देश्य डिग्रियों की वैधता की पुष्टि करना है, इसलिए जांच पूरी होने से पहले अभ्यर्थियों के बारे में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

जेएसएससी की अनुशंसा के बाद विभाग अभ्यर्थियों की काउंसिलिंग पूरी कर चुका था और नियुक्ति पत्र देने की तैयारी चल रही थी। इसी बीच महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति में एक निजी विश्वविद्यालय की डिग्रियों से जुड़ा मामला सामने आने के बाद माध्यमिक आचार्य अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की भी गहन जांच कराने का निर्णय लिया गया।

माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा का एक अन्य मामला भी न्यायिक जांच के दायरे में है। कंप्यूटर हैक होने के बाद 2,819 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा कराई गई थी। हाई कोर्ट ने इस प्रकरण में सीआईडी जांच और प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश देने के साथ आयोग से इन अभ्यर्थियों की पहले हुई परीक्षा के अंक भी प्रकाशित करने को कहा है।