मेदिनीनगर केंद्रीय कारा में गुरुवार को बोर्ड ऑफ विजिटर और पलामू जिला विधिक सेवा प्राधिकार की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर हुए इस निरीक्षण का नेतृत्व पलामू के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राधा कृष्ण ने किया। टीम ने बंदियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और मुकदमों की पैरवी की स्थिति की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विभिन्न बैरकों के साथ महिला वार्ड, मुलाकाती सहायता केंद्र, मेडिकल वार्ड, रसोईघर, स्टोर रूम और पुस्तकालय का जायजा लिया। कारा परिसर में संचालित प्रिंटिंग प्रेस तथा कपड़ा बुनाई केंद्र की व्यवस्था भी देखी गई। टीम ने जेल में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा की।
पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई की स्थिति भी जांच के दायरे में रही। अधिकारियों ने यह देखा कि बंदियों को निर्धारित मेनू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है या नहीं। निरीक्षण में भोजन समेत अन्य व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। टीम ने सफाई की स्थिति पर भी संतोष जताया, जबकि पुस्तकालय में पठन-पाठन की किताबें और संगीत उपकरण सही अवस्था में मिले।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी बंदी अधिवक्ता से वंचित नहीं रहना चाहिए। पात्र बंदियों के लिए डालसा के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। किसी समस्या की स्थिति में बंदी जेल के पैरा लीगल वॉलंटियर के माध्यम से लिखित शिकायत डालसा तक पहुंचा सकते हैं।
टीम ने बंदियों से उनके मामलों की पैरवी और वकीलों की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली तथा सामने आई समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया। महिला वार्ड में बंद महिलाओं से भी अलग से बातचीत की गई। वहां रह रहे करीब आधा दर्जन छोटे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के संबंध में जानकारी लेकर उन्हें बिस्कुट और टॉफी दी गई।
अधिकारियों के अनुसार निरीक्षण का उद्देश्य जेल प्रशासन की व्यवस्था बेहतर बनाए रखना, बंदियों को आवश्यक सुविधाएं दिलाना और भेदभाव या उत्पीड़न जैसी किसी स्थिति का पता लगाना था। संयुक्त टीम में पलामू के उपायुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत, पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी, डालसा सचिव सौरभ कुमार गौतम, सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव और अन्य संबंधित अधिकारी शामिल थे।