रांची में कृषि विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान जिलों में बीज के अधूरे उठाव और कई योजनाओं की कमजोर वित्तीय प्रगति पर कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने नाराजगी जताई। उन्होंने जिला कृषि पदाधिकारियों को रबी मौसम के बीज समय पर उपलब्ध कराने और निर्धारित काम तय अवधि में पूरा करने का निर्देश दिया।
समीक्षा में बिरसा बीज उत्पादन, वितरण एवं फसल विस्तार योजना और आत्मनिर्भरता-दलहन योजना के तहत जिलों के लिए निर्धारित बीज की पूरी मात्रा नहीं उठाए जाने का मामला सामने आया। अधिकारियों से कहा गया कि लैम्पस और पैक्स के साथ निजी बीज आपूर्तिकर्ताओं तथा किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से भी उठाव कराया जाए। निर्धारित बैंक ड्राफ्ट तुरंत जमा कराने के निर्देश भी दिए गए।
आधारभूत संरचना एवं ग्रामीण हाट बाजार योजना के पुराने प्रस्तावों को नए एसओआर के अनुसार दोबारा तैयार करना होगा। तकनीकी स्वीकृति लेने के बाद इन्हें एक सप्ताह में निदेशालय भेजने को कहा गया है। इस योजना से संयुक्त कृषि भवन, हाट बाजार, प्रशिक्षण भवन और प्रयोगशाला का निर्माण कराया जा सकता है।
अक्टूबर और नवंबर में प्रमंडल स्तर के जिला मुख्यालयों में कृषि व्यापार मेले आयोजित करने की योजना है। प्रत्येक प्रमंडल के लिए 40 लाख रुपये का आवंटन जारी किया जाएगा। नोडल पदाधिकारी को पांचों प्रमंडलों के जिला कृषि पदाधिकारियों के साथ तत्काल बैठक करने और राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित कराने की जिम्मेदारी दी गई।
फसल सुरक्षा कार्यक्रम में कम वित्तीय उपलब्धि को देखते हुए फसल रक्षक की नियुक्ति से जुड़ा रोस्टर क्लियरेंस दो दिनों में कराने और उसके बाद विज्ञापन प्रकाशित करने को कहा गया। जरूरी उपकरण, मशीन और रसायन की खरीद जेम पोर्टल से शीघ्र करने का निर्देश भी दिया गया। किसान समृद्धि योजना के तहत दो और पांच एचपी के सोलर पंपसेट का संशोधित लक्ष्य जिलों को दिया गया है। ई-केएसवाई करा चुके किसानों को प्राथमिकता मिलेगी और पंप लगाने से पहले 10 प्रतिशत कृषक अंशदान लिया जाएगा।
पीडीएमसी योजना में कुछ जिलों में अमानक उपकरणों की आपूर्ति पर भी आपत्ति जताई गई। नए उपकरण एक सप्ताह में लगाने और लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र भेजने को कहा गया है। वर्षा से प्रभावित मृदा नमूना संग्रह का लक्ष्य शीघ्र पूरा करने, एग्री क्लिनिक का बकाया भुगतान करने तथा प्रयोगशालाओं को मजबूत करने के प्रस्ताव निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए गए।