रांची में आयोजित डिगी हेल्थ कॉन्क्लेव में राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र सरायकेला के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और डिजिटल तकनीक पर केंद्रित आयोजन के बीच इस सांस्कृतिक कार्यक्रम ने झारखंड की छऊ परंपरा को राष्ट्रीय स्तर के मंच पर सामने रखा। दर्शकों ने प्रस्तुति का करतल ध्वनि के साथ स्वागत किया।
छऊ दल ने पद्मश्री सम्मानित गुरु तपन कुमार पटनायक के नेतृत्व में कार्यक्रम में भाग लिया। कलाकारों ने भाव-भंगिमा, नियंत्रित शारीरिक विन्यास और लयबद्ध गतियों के माध्यम से सरायकेला छऊ की पहचान प्रस्तुत की। कार्यक्रम में रजतेंदु रथ और गंभीर महतो की भी सहभागिता रही।
प्रस्तुति के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक और पारंपरिक विषयों को स्थान दिया गया। निबारण महतो और काली प्रसन्न सारंगी ने हर-पार्वती नृत्य प्रस्तुत किया। विजय सरदार तथा बैसागु सरदार ने राधा-कृष्ण प्रसंग को नृत्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया, जबकि बिस्मत कैबर्त ने आरती नृत्य की प्रस्तुति दी।
नृत्य के साथ पारंपरिक वाद्य कलाकारों ने मंच पर संगति दी। ढोल पर उस्ताद तरुण कुमार भोल, नगाड़े पर गुरु तपन कुमार पटनायक, झांझ पर कुशमी पटनायक और बांसुरी पर गोपबंधु तांती शामिल रहे। वाद्यों की लय और कलाकारों की गतियों के तालमेल ने प्रस्तुति के सामूहिक स्वरूप को उभारा।
कॉन्क्लेव में हुई इस प्रस्तुति के जरिए सरायकेला छऊ की गुरु-शिष्य परंपरा और सामूहिक साधना की झलक भी देखने को मिली। तकनीक और चिकित्सा से जुड़े कार्यक्रम में पारंपरिक कला के समावेश ने आयोजन को सांस्कृतिक आयाम दिया तथा बाहर से आए प्रतिनिधियों के सामने झारखंड की विरासत को प्रदर्शित किया।