रांची में पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन, साउथ छोटानागपुर ने ईंधन खरीद के यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित अतिरिक्त लागत को लेकर चिंता जताई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजहंस मिश्रा ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री को पत्र भेजकर डीलर कमीशन की समीक्षा करने और डिजिटल लेनदेन से जुड़ने वाली नई लागत की भरपाई की व्यवस्था बनाने की मांग की है।
एसोसिएशन का कहना है कि पेट्रोल पंप संचालकों को कर्मचारियों के वेतन, बिजली, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सुरक्षा और उपकरणों के रखरखाव जैसे कई परिचालन खर्च उठाने पड़ते हैं। इसके अलावा ऑटोमेशन और वैधानिक अनुपालन पर भी राशि खर्च होती है। संगठन के अनुसार, इन मदों में लगातार वृद्धि के बीच यूपीआई से जुड़ी अतिरिक्त लागत मौजूदा डीलर मार्जिन पर दबाव बढ़ा सकती है।
मंत्री को भेजे पत्र में संभावित वित्तीय असर समझाने के लिए एक उदाहरण भी दिया गया है। एसोसिएशन के आकलन के मुताबिक, किसी पंप पर प्रतिदिन दो हजार रुपये से अधिक मूल्य वाले 200 पात्र यूपीआई लेनदेन हों और हर लेनदेन पर पांच रुपये की लागत आए, तो प्रतिदिन करीब एक हजार रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। संगठन ने इसे लगभग 30 हजार रुपये मासिक और 3.65 लाख रुपये वार्षिक बताया है।
डीलरों के संगठन ने कहा है कि अधिक डिजिटल लेनदेन वाले पेट्रोल पंपों पर यह राशि और बढ़ सकती है। उसका तर्क है कि पंप संचालकों ने दूरदराज के क्षेत्रों तक यूपीआई और दूसरी डिजिटल भुगतान सुविधाएं उपलब्ध कराकर नकदरहित लेनदेन को बढ़ावा दिया है। ऐसे में नई भुगतान लागत को सीधे उनके वर्तमान मार्जिन से वहन कराना उचित नहीं होगा।
एसोसिएशन ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें यूपीआई या एमडीआर से पैदा होने वाली नई लागत को डीलर कमीशन के लागत घटक में शामिल करना, बढ़ते परिचालन खर्च के आधार पर कमीशन की व्यापक समीक्षा करना और अतिरिक्त डिजिटल भुगतान खर्च के लिए प्रतिपूर्ति अथवा मुआवजे की व्यवस्था लागू करना शामिल है।
पत्र में पेट्रोलियम मंत्रालय से आवश्यक निर्देश जारी करने और डीलर कमीशन में संशोधन की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया गया है। एसोसिएशन ने डिजिटल भुगतान को आगे भी प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन कहा है कि इसकी अतिरिक्त लागत का पूरा भार पेट्रोल पंपों के मौजूदा परिचालन मार्जिन पर नहीं पड़ना चाहिए।