रांची विश्वविद्यालय में पहली बार पीएचडी नामांकन पर लागू होगा आरक्षण रोस्टर, 331 सीटें तय

रांची विश्वविद्यालय के 30 स्नातकोत्तर विभागों की 331 पीएचडी सीटों पर आरक्षण रोस्टर के अनुसार नामांकन होगा। आवेदन के बाद अभ्यर्थियों की श्रेणीवार छंटनी की जाएगी।

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रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी की 331 सीटों पर आरक्षण रोस्टर लागू

रांची विश्वविद्यालय में पहली बार पीएचडी नामांकन के दौरान आरक्षण रोस्टर लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने पीएचडी रेगुलेशन 2022 के तहत अपने 30 स्नातकोत्तर विभागों में शोध के लिए कुल 331 सीटें निर्धारित की हैं। इन सीटों पर अभ्यर्थियों का चयन तय श्रेणीवार व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा।

जारी सीट विवरण के मुताबिक सामान्य वर्ग के लिए 153 सीटें रखी गई हैं। अनुसूचित जनजाति वर्ग को 85 और अनुसूचित जाति वर्ग को 34 सीटें मिली हैं। बीसी-वन के लिए 30, ईडब्ल्यूएस के लिए 16 तथा बीसी-टू वर्ग के लिए 13 सीटें निर्धारित की गई हैं। इन सभी आंकड़ों का कुल योग 331 है।

नई व्यवस्था में आवेदन जमा होने के बाद अभ्यर्थियों को आरक्षण रोस्टर के आधार पर छांटा जाएगा। विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर नामांकन के दौरान आरक्षण का पालन पहले से होता रहा है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार 63 वर्षों में पहली बार पीएचडी प्रवेश में भी इसे व्यवस्थित रूप से लागू किया जा रहा है।

अब तक यूजीसी जेआरएफ, नेट या प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी शोध करा रहे शिक्षकों से सीधे संपर्क कर दाखिला लेते थे। इस प्रक्रिया में आरक्षण नीति का अनुपालन स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता था। नए रेगुलेशन के बाद विभागवार उपलब्ध सीटों को रोस्टर के अनुसार बांटा गया है।

विश्वविद्यालय के सोशल साइंस डीन और शोध निदेशक डॉ. परवेज हसन के अनुसार, पीएचडी में आरक्षण लागू करने का उद्देश्य केवल सीटें भरना नहीं, बल्कि शोध में सामाजिक विविधता बढ़ाना भी है। उनका कहना है कि अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों की भागीदारी से अनुसंधान का दायरा व्यापक हो सकता है।

इस व्यवस्था से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा तथा शोध में निर्धारित प्रतिनिधित्व का रास्ता स्पष्ट होगा। साथ ही शोधार्थियों के चयन में शिक्षकों की व्यक्तिगत पसंद के स्थान पर घोषित नियम और श्रेणीवार सीटों की भूमिका बढ़ेगी।