राजखरसावां–डांगोआपोसी चौथी रेल लाइन को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने झारखंड के राजखरसावां–डांगोआपोसी रेलखंड पर चौथी लाइन को मंजूरी दी है। इसे ओडिशा की पारादीप–हरिदासपुर दोहरीकरण परियोजना के साथ स्वीकृत किया गया है।

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हरित पहाड़ी क्षेत्र से गुजरता विद्युतीकृत माल रेल गलियारा — AI-निर्मित सांकेतिक चित्र

पश्चिमी सिंहभूम: केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने बुधवार को राजखरसावां–डांगोआपोसी रेलखंड पर चौथी लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी। यह रेलखंड दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल में झारखंड के खनिज और औद्योगिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रस्तावित अतिरिक्त लाइन से मौजूदा मार्ग की क्षमता बढ़ाने और भीड़ कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की 15 जुलाई की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राजखरसावां–डांगोआपोसी चौथी लाइन को ओडिशा की पारादीप–हरिदासपुर दोहरीकरण परियोजना के साथ स्वीकृति मिली है। दोनों परियोजनाओं की संयुक्त अनुमानित लागत लगभग 3,907 करोड़ रुपये है और इन्हें 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य है। विज्ञप्ति में झारखंड वाली परियोजना की अलग लागत नहीं बताई गई है, इसलिए 3,907 करोड़ रुपये को केवल राजखरसावां–डांगोआपोसी लाइन की लागत नहीं माना जाना चाहिए।

यात्री और माल परिवहन क्षमता बढ़ने की उम्मीद

सरकार का कहना है कि बहु-लाइन परियोजनाओं से ट्रेनों की आवाजाही, परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता बेहतर होगी। राजखरसावां से डांगोआपोसी की दिशा में चाईबासा, झींकपानी और केंदपोसी जैसे स्टेशन आते हैं। यह मार्ग लौह अयस्क सहित खनिज माल ढुलाई के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए चौथी लाइन से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों के संचालन में उपलब्ध क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

पीआईबी ने दोनों स्वीकृत परियोजनाओं के संयुक्त प्रभाव के तौर पर लगभग 145 किलोमीटर रेल नेटवर्क वृद्धि, करीब 1,526 गांवों और लगभग 14 लाख आबादी के लिए बेहतर संपर्क तथा सालाना 44 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता का अनुमान दिया है। सरकार ने यह भी कहा है कि रेल परिवहन बढ़ने से तेल आयात और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिल सकती है। ये सभी आंकड़े दोनों परियोजनाओं के संयुक्त अनुमान हैं।

कैबिनेट की मंजूरी परियोजना के क्रियान्वयन की औपचारिक दिशा तय करती है। भूमि, निर्माण चरण, स्टेशनवार कार्य और यातायात व्यवस्था से संबंधित विस्तृत समय-सारणी रेलवे की ओर से आगे जारी की जाएगी। इसलिए स्थानीय यात्रियों और कारोबारियों के लिए वास्तविक बदलाव निर्माण की प्रगति के साथ क्रमशः दिखाई देंगे।

स्रोत और मूल प्रकाशन समय

चित्र: AI-निर्मित सांकेतिक चित्र। यह किसी वास्तविक निर्माण-स्थल या पूर्ण परियोजना का फोटोग्राफ नहीं है।