रातू में 19 साल से बेकार पड़ा 60 लाख का पुल, एक छोर पर अब भी पहुंच पथ नहीं

रांची के रातू प्रखंड स्थित चितरकोटा छोटकाटोली में करीब 19 वर्ष पहले बना पुल दूसरे छोर पर पहुंच पथ नहीं होने के कारण आवागमन के काम नहीं आ रहा है।

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रातू के चितरकोटा छोटकाटोली में पहुंच पथ के बिना अनुपयोगी पड़ा पुल

रांची जिले के रातू प्रखंड के चितरकोटा छोटकाटोली में करीब 19 वर्ष पहले बनाया गया पुल अब तक नियमित आवागमन का साधन नहीं बन सका है। लगभग 300 फीट लंबे इस पुल के एक छोर तक पक्की सड़क पहुंचती है, लेकिन दूसरे छोर पर पहुंच पथ नहीं होने से ग्रामीण इसका इस्तेमाल आने-जाने के लिए नहीं कर पा रहे हैं।

ग्रामीण विकास विभाग की ओर से वर्ष 2007 के आसपास करीब 60 लाख रुपये की लागत से पुल बनवाए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के समय इलाके में सड़क संपर्क सीमित था। नाले के जिस हिस्से में पुल तैयार किया गया, वहां नियमित आवाजाही भी नहीं होती थी और दूसरी ओर जाने का रास्ता उपलब्ध नहीं था।

करीब तीन वर्ष पहले गांव के भीतर से पुल के एक छोर तक लगभग छह फीट चौड़ी पक्की सड़क बनाई गई। इसके बावजूद दूसरे छोर को सड़क से नहीं जोड़ा गया। अधूरे संपर्क के कारण पुल पर वाहनों और राहगीरों की आवाजाही शुरू नहीं हो सकी। फिलहाल ग्रामीण यहां मवेशी बांधते और कपड़े सुखाते हैं।

चितरकोटा छोटकाटोली रातू से करीब 11 किलोमीटर और राष्ट्रीय राजमार्ग-75 से लगभग छह किलोमीटर दूर है। स्थानीय निवासी रंजीत खलखो के अनुसार, निर्माण शुरू होने के करीब छह महीने बाद तक गांव के कई लोगों को पुल के बारे में जानकारी नहीं थी, क्योंकि नाले के उस हिस्से की ओर लोगों का आना-जाना नहीं था।

ग्रामीणों ने पुल की योजना, प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति, वास्तविक लागत तथा पहुंच पथ नहीं बनने के कारणों की जांच की मांग की है। उनकी मांग है कि संबंधित विभाग स्थल निरीक्षण कर यह तय करे कि पुल को उपयोगी बनाने के लिए दूसरे छोर तक सड़क किस तरह बनाई जा सकती है।

स्थानीय जानकारों का अनुमान है कि इसी आकार का पुल आज बनाया जाए तो तीन से चार करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले से बनी संरचना को दोनों ओर सड़क से जोड़ दिया जाए तो आसपास के लोगों को आवागमन की सुविधा मिल सकती है और वर्षों से अनुपयोगी पड़ी सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल शुरू हो सकेगा।