सरायकेला में अशोका इंटरनेशनल स्कूल में ‘तरू भ्राता’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस कार्यक्रम में बच्चों ने पौधों के साथ राखी का प्रतीकात्मक रिश्ता जोड़ा और उनके संरक्षण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि विद्यार्थियों ने राखियां स्वयं तैयार कीं। इसके बाद बच्चों ने इन्हें पौधों को बांधा। इस गतिविधि के जरिए स्कूल परिसर में पर्यावरण संरक्षण को भावनात्मक और व्यावहारिक रूप से समझाने की कोशिश की गई।
राखी सामान्य रूप से सुरक्षा और जिम्मेदारी के भाव से जुड़ी मानी जाती है। स्कूल के इस आयोजन में उसी भाव को पौधों की देखभाल से जोड़ा गया। बच्चों ने पौधों को केवल सजावटी वस्तु की तरह नहीं, बल्कि संरक्षित किए जाने योग्य जीवित संपदा के रूप में देखने का संदेश दिया।
‘तरू भ्राता’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी केंद्र में रही। स्वयं राखी बनाना और फिर उसे पौधों को बांधना बच्चों के लिए सीखने की ऐसी गतिविधि बनी, जिसमें कला, संवेदना और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी एक साथ सामने आई।
इस तरह के आयोजन स्कूल स्तर पर पर्यावरण शिक्षा को कक्षा से बाहर ले जाते हैं। पौधों की देखभाल का संकल्प बच्चों में नियमित जिम्मेदारी की भावना पैदा कर सकता है, बशर्ते यह पहल आगे भी देखभाल और संरक्षण की गतिविधियों से जुड़ी रहे।
उपलब्ध विवरण में कार्यक्रम को सरायकेला की स्थानीय शैक्षणिक गतिविधि के रूप में बताया गया है। इसमें किसी अतिरिक्त दावे, संख्या या औपचारिक घोषणा का उल्लेख नहीं है, इसलिए रिपोर्ट को स्कूल में हुए कार्यक्रम और बच्चों के संकल्प तक सीमित रखा गया है।