सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी दयामनी किंडो ने अपनी आजीविका के कई साधन विकसित किए हैं। टैसेर पश्चिमी पंचायत के पथरीटोली गांव की दयामनी ने बतख और बकरी पालन के साथ कृषि तथा कैडर गतिविधियों से अब तक कुल 94,600 रुपये की आय अर्जित की है।
दयामनी वर्ष 2020 में जेएसएलपीएस के अंतर्गत संचालित कमल स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनी थीं। समूह की बैठकों, बचत और दूसरी गतिविधियों में नियमित भागीदारी के बाद उन्हें बागवानी सखी कैडर की जिम्मेदारी भी मिली। इससे उन्हें कृषि और आजीविका से जुड़े कामों का अनुभव बढ़ाने का अवसर मिला।
समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की आमदनी मुख्य रूप से वर्षा आधारित धान की खेती, बकरी पालन और मजदूरी पर निर्भर थी। सीमित तथा अस्थिर आय के बीच दयामनी ने समूह से मिले ऋण, तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन का उपयोग अतिरिक्त काम शुरू करने में किया। छोटे और बड़े ऋण के रूप में उन्होंने कुल 32 हजार रुपये लिए और यह राशि आजीविका गतिविधियों में लगाई।
सितंबर 2025 में हार्डनिंग सेंटर या मदर यूनिट के माध्यम से उन्हें बतख के 40 चूजे मिले। इसके बाद उन्होंने बतख पालन आगे बढ़ाया और बकरी पालन का भी विस्तार किया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, बतख और अंडों की बिक्री से उन्हें 20 हजार रुपये तथा बकरी और खस्सी की बिक्री से 52 हजार रुपये प्राप्त हुए।
कैडर और कृषि आधारित गतिविधियों से दयामनी ने अतिरिक्त 22,600 रुपये अर्जित किए। इन सभी स्रोतों को मिलाकर उनकी आय 94,600 रुपये तक पहुंची। इस व्यवस्था से परिवार अब किसी एक काम पर निर्भर नहीं है और खेती, पशुपालन तथा कैडर से जुड़े कार्य साथ-साथ कर रहा है।
दयामनी अपने पति सुनीत किंडो के साथ परिवार चलाती हैं। उनकी दो बेटियां नजदीकी सरकारी विद्यालय में पढ़ती हैं। आय बढ़ने से परिवार को बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतें पूरी करने में सहूलियत मिली है। गांव के कुछ अन्य परिवार भी उनकी गतिविधियों को देखकर बतख और दूसरे पशुओं के पालन में रुचि दिखा रहे हैं।