सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड में सरकारी योजना से मिले 500 ब्रॉयलर चूजों ने एक ग्रामीण परिवार के लिए आमदनी का नया रास्ता खोला है। टिनगिना पंचायत के ढोढ़ीबहार गांव निवासी असीम होरो ने मुर्गीपालन को व्यवस्थित रूप से अपनाया है। इससे उन्हें अब प्रति माह करीब 10 हजार रुपये की आय हो रही है और परिवार की आर्थिक स्थिति को सहारा मिला है।
कक्षा 12वीं तक पढ़े असीम को मुर्गीपालन का विचार इंटरनेट पर इससे संबंधित वीडियो देखने के बाद आया। इसी दौरान जलडेगा में कार्यरत लीड्स संस्था की एक बैठक में ग्रामीणों को कृषि और पशुपालन विभाग की योजनाओं की जानकारी दी गई। बैठक में असीम की मां कुंवारी होरो को मुर्गीपालन के माध्यम से आजीविका बढ़ाने के विकल्प के बारे में बताया गया।
योजना में रुचि दिखाने के बाद कुंवारी होरो ने विभाग में आवेदन किया। स्वीकृति मिलने पर उन्हें नि:शुल्क 500 ब्रॉयलर चूजे उपलब्ध कराए गए। इसके बाद असीम ने जुलाई से मुर्गीपालन शुरू किया और सरकारी सहायता से मिले चूजों को नियमित आय देने वाले काम में बदलने का प्रयास किया।
असीम मुर्गियों के लिए सिमडेगा से चारा लाते हैं। वह नियमित रूप से दाना-पानी देने के साथ पक्षियों के स्वास्थ्य और उनके रहने की जगह की साफ-सफाई पर भी ध्यान देते हैं। उनके मुताबिक, लगातार देखभाल और मेहनत से मुर्गीपालन से आमदनी शुरू हुई है। यह राशि परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है।
असीम का अनुभव बताता है कि योजनाओं की सही जानकारी मिलने और उपलब्ध सहायता का नियमित मेहनत के साथ उपयोग करने पर गांव में भी आजीविका का साधन तैयार किया जा सकता है। उनका कहना है कि रोजगार शुरू करने के लिए जानकारी, योजना का लाभ और काम करने की इच्छा जरूरी है। ढोढ़ीबहार में शुरू हुई यह पहल स्थानीय ग्रामीण युवाओं के सामने स्वरोजगार का एक व्यावहारिक उदाहरण रखती है।