मेदिनीनगर में 85 फीट ऊंचे पूजा पंडाल में भक्ति जागरण, कलाकारों ने प्रस्तुत किए भजन
जीएलए कॉलेज के पास जय मां जगदंबे क्लब के पूजा पंडाल में भक्ति जागरण और सम्मान समारोह हुआ। मायापुर के इस्कॉन मंदिर की शैली में बना पंडाल आकर्षण का केंद्र रहा।
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जीएलए कॉलेज के पास जय मां जगदंबे क्लब के पूजा पंडाल में भक्ति जागरण और सम्मान समारोह हुआ। मायापुर के इस्कॉन मंदिर की शैली में बना पंडाल आकर्षण का केंद्र रहा।
नवरात्र के अवसर पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोजन, प्रसाद, उपहार और दक्षिणा दी गई। साथ ही विधि-विधान से शस्त्र पूजन किया गया।
मरहटिया क्षेत्र में महिलाएं और बच्चियां फूलों की डलिया लेकर मंदिरों तक जाती हैं। सात दिनों की पूजा, लोकगीत और झूमर के बाद सप्तमी को प्रतिमाओं का विसर्जन होता है।
रांची और आसपास के कई मैदानों में 20 अक्टूबर को रावण दहन होगा। मोरहाबादी में 70 फीट का पुतला, सोने की लंका, लेजर शो और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रमुख आकर्षण रहेंगी।
सोनारी के एक परिवार ने दुर्गा पूजा के साथ दक्षिण भारत की पारंपरिक गोलू पूजा आयोजित की है। सात सीढ़ियों पर सजी गुड़ियां देवी-देवताओं, पौराणिक प्रसंगों और लोकजीवन की झलक दिखा रही हैं।
तामड़ा पूजा स्थल पर आयोजित कन्या पूजन महोत्सव में उपायुक्त कंचन सिंह शामिल हुईं। कन्याओं को वस्त्र, उपहार और प्रसाद दिए गए।
रांची के मोरहाबादी, अरगोड़ा और शालीमार मैदान सहित छह स्थानों पर विजयादशमी के कार्यक्रम होंगे। प्रमुख आयोजनों की शुरुआत शाम चार बजे से करने की तैयारी है।
मोरहाबादी मैदान में 80 फीट के रावण समेत तीन पुतलों का दहन होगा। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, आतिशबाजी और लेजर शो की भी तैयारी की गई है।
बाबा बैद्यनाथ धाम की धार्मिक परंपरा में रावण की शिवभक्ति और ज्योतिर्लिंग की स्थापना से जुड़ी मान्यता के कारण देवघर में विजयादशमी पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता।
कुंडा स्थित रामकृष्ण मठ में महाष्टमी पर बेलूर मठ की परंपरा के अनुसार कुमारी और संधि पूजा हुई। अनुष्ठान में 108 दीप और 108 कमल पुष्प अर्पित किए गए।
करों प्रखंड के डिंडाकोली गांव स्थित दुर्गा मंदिर में अष्टमी पर विशेष पूजा हुई। करीब तीन शताब्दियों पुरानी परंपरा में शामिल होने के लिए बाहर रहने वाले ग्रामीण भी गांव लौटे।
हजारीबाग शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक दुर्गा पूजा पंडाल बनाए गए हैं। शिक्षा, राष्ट्रभक्ति और पारंपरिक वास्तुकला पर आधारित इन पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।
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