भवनाथपुर में 15 रुपये से शुरू हुई दुर्गा पूजा परंपरा ने पूरे किए 64 वर्ष
गढ़वा के भवनाथपुर बस्ती में वर्ष 1962 से दुर्गा पूजा आयोजित हो रही है। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ आयोजन अब भव्य रूप ले चुका है, लेकिन इसकी सामुदायिक पहचान कायम है।
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गढ़वा के भवनाथपुर बस्ती में वर्ष 1962 से दुर्गा पूजा आयोजित हो रही है। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ आयोजन अब भव्य रूप ले चुका है, लेकिन इसकी सामुदायिक पहचान कायम है।
शारदीय नवरात्र के दौरान इटखोरी स्थित मां भद्रकाली मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी है। माता का प्रतिदिन करीब 50 तोला सोने के आभूषणों से शृंगार किया जा रहा है।
काशीडीह दुर्गा पूजा मैदान में तीन आकार के 50 हजार से अधिक मिट्टी के घड़ों और बांस की कामाची से पर्यावरण अनुकूल पंडाल तैयार किया जा रहा है।
सरायकेला के बाटीडीह गांव में आयोजित छऊ चौपाल में पारंपरिक नृत्य के संरक्षण, महिला सहभागिता, कलाकारों के प्रशिक्षण और नई पीढ़ी तक सांस्कृतिक विरासत पहुंचाने पर चर्चा हुई।
लाखे नूतननगर में 75 फीट ऊंचे तिरंगा थीम वाले दुर्गा पूजा पंडाल को अंतिम रूप दिया जा रहा है। आयोजन के दौरान सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी की तैयारी है।
ताराटांड़ में दुर्गोत्सव की तैयारियां तेज हैं। शिवलिंग के स्वरूप वाले पंडाल में 12 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
महागामा के हनवारा थाना क्षेत्र में एसडीपीओ वरुण रजक ने संग्रामपुर दुर्गा मंदिर, पूजा पंडाल और मेला स्थल का निरीक्षण कर भीड़ प्रबंधन व सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की।
प्रिंस चौक में 1963-64 से आयोजित हो रही दुर्गा पूजा इस वर्ष भी कलश स्थापना के साथ शुरू हुई। समिति ने बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन से पार्किंग की उचित व्यवस्था कराने की मांग की है।
मोरहाबादी में 70 फीट और अरगोड़ा में 60 फीट ऊंचे रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। आयोजनों में रामलीला, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, लेजर शो और आतिशबाजी भी प्रस्तावित है।
रेलवे ने धनबाद मंडल से गुजरने वाली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस समेत 10 जोड़ी ट्रेनों को 11 से 26 अक्टूबर तक विंध्याचल स्टेशन पर दो मिनट का अस्थायी ठहराव दिया है।
निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन की चाईबासा शाखा ने क्षेत्रीय अधिवेशन के उपलक्ष्य में विद्यार्थियों के लिए चित्रांकन और काव्य पाठ प्रतियोगिताएं आयोजित कीं।
हाता के माताजी आश्रम में झारखंड साहित्य संस्कृति परिषद के 23वें वार्षिक सम्मेलन के दौरान बहुभाषी पत्रिका, मौलिक पुस्तकों और अनुवाद कृति का लोकार्पण हुआ।
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